Pashupati Nath Varat Kese Kare 2023 june mein? पशुपतिनाथ व्रत कैसे करें 2023 ?

पशुपतिनाथ व्रत क्या है?

पशुपतिनाथ व्रत महादेव को समर्पित है। पशुपति महादेव का ही एक भिन्न नाम है। वैसे तो इस व्रत की महिमा निराली है, पर हमारे विश्वास करने से इसकी महिमा दोगुनी हो जाती है। इस व्रत को अपनी किसी भी मुख्य मनोकामना को पूर्ण करने के लिए किया जाता है, आप इस व्रत को किसी भी महीने के किसी भी सोमवार को शुरू कर सकते हैं। यह व्रत पांच सोमवार का होता है। परंतु इस व्रत को विधि के अनुसार करना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं पशुपतिनाथ व्रत कैसे करें 2023

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व्रत करने के लिए आवश्यक सामग्री (सामान)

थाली तैयार करने के लिए सबसे पहले एक थाली ले और उसमें 1 कटोरी घी, 1 कटोरी दही, एक कटोरी सफेद तिल, एक कटोरी गुलाल, एक कटोरी कच्चा दूध, एक कटोरी शहद, एक कटोरी शक्कर, विल्व पत्र, पुष्प, धूप, चंदन, लाल चंदन, फल, इत्र, एक लोटा कच्ची लस्सी तथा कच्चा जनेऊ (सफेद धागा) होना चाहिए। शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए आपको एक कमंडल जल की जरूरत पड़ेगी।

पशुपतिनाथ व्रत करने की सही विधि

सबसे पहले जल से शिवलिंग और शिवलिंग के आसपास की जगह को साफ कीजिए,विधि पूर्वक शिवलिंग का अभिषेक करें हर चीज को कुछ-कुछ मात्रा में शिवलिंग पर लगाएं, हर सामग्री को शिवलिंग पर समर्पित कीजिए, जैसे छोटे बच्चे को नेहलाया जाता है, वैसे ही श्रद्धा भाव से शिवलिंग का अभिषेक कीजिए, हर सामग्री का उतना ही प्रयोग करिए की बची हुई सामग्री शाम की क्रिया में भी काम आ जाए। अभिषेक के साथ साथ अपने मन में किसी ना किसी मंत्र का उच्चारण करते रहे।

लगातार पांच सोमवार इस विधि को श्रद्धा पूर्वक करिए। पांचवी सोमवार की शाम को पशुपतिनाथ के लिए कुछ मीठा खाना या प्रसाद बनाइए। याद रखिए प्रसाद उतना ही बनाए जितना आप भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं।आप जितना भी प्रसाद बनाएंगे वह सारा का सारा ही भगवान शिव को चढ़ाया जाना चाहिए।

पांचवे सोमवार की शाम।

पांचवे सोमवार को कुछ और सामग्री मिलाए जाती हैं। जैसे कि एक पानी वाला नारियल, छे घी से भरे दीपक, (इनमें से) मन अनुसार108 बेलपत्र, हरी मूंग की दाल, शमी पत्र, आदि। थाली में से 6 दीपक निकालकर शिवलिंग के सामने रखें। 6 में से 5 दीपक को जला ले और साथ-साथ अपना नाम गोत्र बोल कर अपनी मनोकामना शिव को बताएं। प्रसाद के बराबर तीन हिस्से करके शिव को समर्पित करें और तीनों हिस्से शिव के सम्मुख रखें, नारियल शिवलिंग को समर्पित करिए, संपूर्ण तरीके से सच्चे मन से सच्चे विश्वास से अपनी मनोकामना पशुपतिनाथ को बताने के बाद, प्रसाद का एक हिस्सा उठाकर अपनी थाली में रख ले,और जो दीपक नहीं जलाया था उसे थाली में रख लीजिए।

ध्यानपूर्वक पढ़ें और समझिए।।

शिव जी को नमस्कार करके, थाली में रखें सामान को लेकर घर आइए। घर की दहलीज के बाहर खड़े होकर अंदर की तरफ मुख करके अपने सीधे हाथ अपनी दाईं तरफ की ओर घर के बाहर दीपक जलाएं जिसे आप शिव मंदिर से लाए थे। फिर से अपना नाम गोत्र बोल कर अपनी मनोकामना शिव को बताएं। घर के अंदर प्रवेश करें और अपने प्रसाद वाले हिस्से को अकेले खाए उसे किसी के भी साथ ना बाटे। प्रसाद खाने के बाद आप अपना भोजन कर सकते हैं, किंतु भोजन सादा होना चाहिए।

कब पशुपतिनाथ व्रत को नहीं करना चाहिए।

व्रत के दौरान यदि किसी सोमवार को कोई काम पड़गया या कोई रजोधर्म आगया या कोई छठ पूजा या कोई और व्रत आ गया तो आप पशुपति व्रत को उस दिन ना करें। मान लीजिए आप के दो व्रत हुए लेकिन तीसरे सोमवार कोई और व्रत जैसे की एकादशी या कोई भी व्रत आ जाता है तो आप उस दिन पशुपतिनाथ व्रत नहीं करें। एक ही दिन में दो व्रत नहीं हो सकते आपके पिछले दो व्रत बेकार नहीं माने जाएंगे आप अगले सोमवार से फिर से पशुपति व्रत शुरू कर सकते हैं। जैसे कि आपने दो किए थे अब अगला व्रत तीसरा ही माना जाएगा किंतु याद रखिए व्रत केवल 5 सोमवार ही होना चाहिए। यह जरूरी नहीं कि वह लगातार हो लेकिन आपको कोशिश करनी है कि वह लगातार हो।

दोहराव और आवश्यक बातें।

अभिषेक करने के दौरान ना किसी से बात करें और ना ही किसी से किसी चीज की मांग करें सारा सामान घर से लेकर जाएं।मंदिर जाने से पहले हर चीज का एक बार ध्यान पूर्वक निरीक्षण कर ले क्योंकि इस व्रत में आप किसी से भी कोई भी चीज मांग नहीं सकते हैं। प्रसाद को किसी के भी साथ बांटना नहीं है। दीपक को शिवलिंग के ऊपर नहीं रखना है उन्हें शिवलिंग के सामने रखे, केवल 5 दिए जलाएं छठे को ना जलाएं प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 दीपक अपनी थाली में वापिस रख ले। प्रसाद के बराबर तीन हिस्से करें शिव को समर्पित करें और एक अपने लिए अपनी थाली में रख लें।प्रसाद को भी शिवलिंग के ऊपर नहीं रखना है, कच्चा धागा (जनेऊ) को केवल सुबह ही शिवलिंग को पहनाना है।

इस व्रत के दौरान पानी भी नहीं पीना चाहिए यदि पानी ग्रहण करना हो तो गोमुख हो कर पिए। जितना हो सके उतनी बार शिव का नाम जपे माला जपे। शाम के समय यदि आप शिवलिंग का अभिषेक नहीं करना चाहते तो सभी चीजों का पंचामृत बनाकर शिवलिंग पर छिड़क सकते हैं।

कुछ मंत्र जिन का उच्चारण आप शिवलिंग अभिषेक के समय कर सकते हैं।
  • श्री शिवाय नमस्तुभयम
  • ओम नमः शिवाय
  • नमः शिव

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